108 Name Of Shani Dev


  • Om shanaescaraya namah
  • Om shantaya namah
  • Om sarvabhistapradayine namah
  • Om sharanyaya namah
  • Om vagenyaya namah
  • Om sarveshaya namah   
  • Om saumyaya namah
  • Om suramvandhaya namah
  • Om suralokaviharine namah
  • Om sukhasonapavishtaya namah
  • Om sundaraya namah
  • Om ghanaya namah
  • Om ghanarupaya namah
  • Om ghanabharanadharine namah
  • Om ghanasaravilepaya namah
  • Om khadyotaya namah
  • Om mandaya namah
  • Om mandaceshtaya namah
  • Om mahaniyagunaatmane namah
  • Om martyapavanapadaya namah
  • Om maheshaya namah
  • Om dhayaputraya namah
  • Om sharvaya namah
  • Om shatatuniradharine namah
  • Om carasthirasvabhavaya namah
  • Om acamcalaya namah
  • Om nilavarnaya namah
  • Om nityaya namah
  • Om nilanjananibhaya namah
  • Om nilambaravibhushaya namah
  • Om nishcalaya namah
  • Om vedyaya namah
  • Om vidhirupaya namah
  • Om virodhadharabhumaye namah
  • Om bhedaspadasvabhavaya namah
  • Om vajradehaya namah
  • Om vairagyadaya namah
  • Om viraya namah
  • Om vitarogabhayaya namah
  • Om vipatparampareshaya namah
  • Om vishvavandyaya namah
  • Om gridhnavahaya namah
  • Om gudhaya namah
  • Om kurmangaya namah
  • Om kurupine namah
  • Om kutsitaya namah
  • Om gunadhyaya namah
  • Om gocaraya namah
  • Om avidhyamulanashaya namah
  • Om vidhyaavidhyasvarupine namah
  • Om ayushyakaranaya namah
  • Om apaduddhartre namah
  • Om vishnubhaktaya namah
  • Om vishine namah
  • Om vividhagamavedine namah
  • Om vidhistutyaya namah
  • Om vandhyaya namah
  • Om virupaakshaya namah
  • Om varishthaya namah
  • Om garishthaya namah
  • Om vajramkushagharaya namah
  • Om varada bhayahastaya namah
  • Om vamanaya namah
  • Om jyeshthapatnisametaya namah
  • Om shreshthaya namah
  • Om mitabhashine namah
  • Om kashtaughanashakartre namah
  • Om pushtidaya namah
  • Om stutyaya namah
  • Om stotragamyaya namah
  • Om bhaktivashyaya namah
  • Om bhanave namah
  • Om bhanuputraya namah
  • Om bhavyaya namah
  • Om pavanaya namah   
  • Om dhanurmandalasamsthaya namah
  • Om dhanadaya namah
  • Om dhanushmate namah
  • Om tanuprakashadehaya namah
  • Om tamasaya namah
  • Om asheshajanavandyaya namah
  • Om visheshaphaladayine namah
  • Om vashikritajaneshaya namah
  • Om pashunam pataye namah
  • Om khecaraya namah
  • Om khageshaya namah
  • Om ghananilambaraya namah
  • Om kathinyamanasaya namah
  • Om aryaganastutyaya namah
  • Om nilacchatraya namah
  • Om nityaya namah
  • Om nirgunaya namah
  • Om gunatmane namah
  • Om niramayaya namah
  • Om nandyaya namah
  • Om vandaniyaya namah   
  • Om dhiraya namah
  • Om divyadehaya namah
  • Om dinartiharanaya namah
  • Om aryajanaganyaya namah
  • Om aryajanaganyaya namah
  • Om kruraya namah
  • Om kruraceshtaya namah
  • Om kamakrodhakaraya namah
  • Om kalatraputrashatrutvakaranaya namah
  • Om pariposhitabhaktaya namah
  • Om parabhitiharaya namah
  • Om bhaktasanghamanobhishtaphaladaya namah

शनि चालिसा



दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।

दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।

करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥


शनि चालिसा


जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥

परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन मणि दमके॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥

पिंगल, कृष्ो, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥

सौरी, मन्द, शनी, दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥

जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं। रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥

पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥

राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥

बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥

रावण की गतिमति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥

दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥

हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवाय तोरी॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥

विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥

तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजीमीन कूद गई पानी॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रौपदी होति उघारी॥

कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥

शेष देवलखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥

वाहन प्रभु के सात सजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥

जम्बुक सिंह आदि नख धारी।सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिंह सिद्धकर राज समाजा॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी॥

तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥

समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥


दोहा


पाठ शनिश्चर देव को, की हों भक्त तैयार।

करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

शनिदेव जी की आरती


जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।

सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ॥

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।


श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी ।

नीलांबर धार नाथ गज की असवारी ॥

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।


किरीट मुकुट शीश सहज दिपत है लिलारी ।

मुक्तन की माल गले शोभित बलिहारी ॥

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।


मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी ।

लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ॥

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।


देव दनुज ॠषि मुनि सुरत नर नारी ।

विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।

Shanidev Ji Ki Aarti


Jay Jay Shri Shanidev Bhaktan Hitakaari,
 Sooraj Ke Putra Prabhu Chaaya Mahataari .
Jay Jay Shri Shanidev Bhaktan Hitakaari.

Shyaam Ank Vakra Drasht Chaturbhujaa Dhaari,
Nilaambar Dhaar Naath Gaj Ki Asavaari .

Jay Jay Shri Shanidev Bhaktan Hitakaari.

Kirit Mukut Shish Sahaj Dipat Hai Lilaari,

Muktan Ki Maal Gale Shobhit Balihaari.
Jay Jay Shri Shanidev Bhaktan Hitakaari.

Modak Mishtaan Paan Chadhat Hai Supaari,

Lohaa Til Tel Udad Mahishi Ati Pyaari.

Jay Jay Shri Shanidev Bhaktan Hitakaari.


Dev Danuj Rishi Muni Surat Nar Naari,
Vishvanaath Dharat Dhyaan Sharan Hai Tumhaari.

Jay Jay Shri Shanidev Bhaktan Hitakaari.